Gaon Ki Badi Yaad Aati Hai |Ghar ki Yaad |ये शायरी सुनकर आपको अपने गाँव की याद आयेगी.. firstlovers.in
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वक़्त का ये परिंदा रुका है कहाँ

मैं था पागल जो इसको बुलाता रहा

चार पैसे कमाने मैं आया शहर

गाँव मेरा मुझे याद आता रहा |


लौटता था मैं जब पाठशाला से घर

अपने हाथों से खाना खिलती थी माँ

रात में अपनी ममता के आँचल तले

थपकीयाँ  देके मुझको  सुलाती थी माँ ||


सोच के दिल में एक टीस उठती रही

रात भर दर्द मुझको जागता रहा

चार पैसे कमाने मैं आया शहर

गाँव मेरा मुझे याद आता रहा ||


सबकी आँखों में आँसू छलक आए थे

जब रवाना हुआ था शहर के लिए

कुछ ने माँगी दुआएँ की मैं खुश रहूं

कुछ ने मंदिर में जाके जलाए दिए ||


एक दिन मैं बनूंगा बड़ा आदमी

ये तसव्वुर उन्हें गुदगुदाता रहा

चार पैसे कमाने मैं आया शहर

गाँव मेरा मुझे याद आता रहा ||


माँ ये लिखती है  हर बार खत में मुझे

लौट आ मेरे बेटे तुझे है क़सम

तू गया जबसे परदेस बेचैन हूँ

नींद आती नहीं भूख लगती है कम ||


कितना चाहा ना रोऊँ मगर क्या करूँ

खत मेरी माँ का मुझको रुलाता रहा

चार पैसे कमाने मैं आया शहर

गाँव मेरा मुझे याद आता रहा ||


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